પ્રભુ કૃપા
પ્રભુ કૃપા - ચીરાગ પટેલ મે 26, 2009
छीद्रोंसे भरा पात्र मेरा, प्रभू, तुम्हीं करो अब कृपा ऐसी;
करो बरखा ऐसी दिव्य प्रेम की, मिट ही जाये यह पात्र उसमें घुला;
कैसा फिर पात्र और कैसे छीद्र, प्रभू, करो ऐसी अब कृपा.
मनमें मेरे बसी हैं एक मूरत, प्रभू, जानो यह सच्ची प्रेम लगन;
करो बरखा ऐसे दिव्य दरशकी, मिट ही जाये प्रेमी से वो अन्तर;
कैसी फिर मूरत और कैसा अन्तर, प्रभू, करो ऐसी अब कृपा.
अन्तरमें हैं अगन जो दरशकी, प्रभू, जानो यह अन्तिम आश;
करो बरखा ऐसे दिव्य मीलनकी, मिट ही जाये दरद अगन बुझे;
कैसे फिर जलूँ और कैसा ‘मैं’, प्रभू, करो ऐसी अब कृपा.
प्रभू, करो ऐसी अब कृपा.
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ભક્તની વાસ્તવીક પરીસ્થીતી અને એના અનુસંધાને જાગરુકતા પુર્વકની એને બંધબેસતી પ્રાર્થના/માગણી સરસ રીતે મુકાઈ છે. આરત પણ પ્રગટ થઈ છે. સરસ. – જુ.