माई – बंसीधर पटेल

माई – बंसीधर पटेल    सप्टेम्बर ०५, १९९१

उमडके आया है माई तेरे नयनोमे प्यार बेसुमार |
भरभर आई है माई तेरे भक्तोकी अखियाँ बेसुमार |
बहुत तडपाया तुमने, हमने करी न कोई फ़रियाद |
आना पडेगा आज, नहीं चलेगी कोई तकरार |

धुप दीप लगाके बैठे है तेरे द्वार, नहीं करवाना ओर इंतज़ार |
भोग भी लगाए है बेसुमार, नहीं तडपाना बारम्बार |
नहीं आएगी तू, दूंगा सौगंध तेरे भक्त-बाल की |
चाहे करले तू कुछ भी, आज नहीं छोड़ेंगे किस हाल |

भागी आई, दौड़ी आई, रुमज़ुम करती आई माई |
लंगूर वीर को भी साथ लाइ, भवानी माता जरुर आई |
चुनरिया तेरी रक्तवर्णी, सोने जैसा मुख |
शेषनाग सा काला केश माँ, पायल की झंकार  |
मुख पे बिंदिया, नयन जैसे टिमटिमाते सितारे |
हाथ तेरे अभय मुद्रामे, शंख चक्र गदा और पाश |

दिया भक्तो को वर, हुए धन्य और निहाल |
भावविभोर सब जन बोले श्री माई की जयजयकार |
मिला जो अवसर माई दर्शन का, अमुलख अति होई |
भवसागर लगाने वाला माई चरण सुख होई |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *